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Saturday, July 25, 2026

ऐ मेरे दोस्त

 ऐ मेरे दोस्त,
कब तक अंधभक्ति में लीन रहोगे?
कब तक वास्तविकता से दूर भागोगे?
सच का सामना करो, अब भी वक्त है,
खुद को बदलने में भला क्या दिक्कत है?

ऐ मेरे दोस्त,
जिस ज़ालिम हुकूमत की बने हो तुम ढाल,
देखना, एक दिन तुम्हें भी करेगी बेहाल।
झूठ की बुनियाद पर खड़ी है जो सियासत,
एक दिन यक़ीनन उद्ध्वस्त होगी वो रियासत!

ऐ मेरे दोस्त,
क्यों किसी के इशारों पर चल रहे हो?
क्यों औरों की कठपुतली बन रहे हो?
क्यों नफ़रत के बीज तुम बो रहे हो?
क्यों अपनी ही पहचान खो रहे हो?

ये मेरे दोस्त
अपनी सोच को आज़ाद करो,
सत्य का अब आगाज़ करो।
खुद के अधिकारों की बात करो,
कभी खुद का भी सम्मान किया करो।

ऐ मेरे दोस्त,
तर्क और विवेक का मार्ग कभी न छोड़ना,
सत्य और न्याय से कभी मुँह न मोड़ना।
सोचने-समझने की क्षमता कभी न खोना,
ज़मीर बेचकर किसी की गुलामी कभी न करना!

ऐ मेरे दोस्त,
बदलाव को अपनाओ, यही तो शाश्वत है,
तुम किसी से कम नहीं, हम आश्वस्त हैं।
यह जंग तो बस तुम्हारे जज़्बात की है,
तुम्हें कहाँ ज़रूरत किसी हुकूमत की है!
संतोबा...

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माझ्या लेखांविषयी काही थोडेसे !!!

माझ्या लेखांविषयी काही थोडेसे !!!

माझ्या लेखणीविषयी काही थोडेसे !!!

ती कोणी अप्सरा वा परी नाही किवा घरंदाज खानदानातील नाही. तिला ना अलंकराची जाण ना साजशृंगाराची हौस. नटूनथटून, साजशृंगार करून एखाद्या वेश्येप्रमाणे मनोरंजन करणे हे ही तिला पटत नाही. ती अशीच आहे,डोंगरदर्यातिल,ओसाड,उजाड़ माळरानावरची राकट,रांगडी,रोखठोख.मोडक्या-तोडक्या झोपडयात विसावणारी. काट्याकुटयातुन,झाडाझुडपातून,दगडधोंडयातुन एखाद्या अवखळ कारवानी घोड्याप्रमाणे धावणारी. ती अशीच आहे आपल्यापेक्षा श्रीमंताची गरीबी पाहून हळहळणारी. ती कशी ही असू दे व्यभिचारी मात्र नक्कीच नाही कारण . ती माझी लेखणी आहे.

आणि थोडेसे माझ्या विषयी !!!

आणि थोडेसे माझ्या विषयी !!!